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प्रमाण

कृष्ण-जन्मभूमि का विवाद

ये पूरा विवाद 13.37 एकड़ जमीन को लेकर है। इसमें 10.9 एकड़ जमीन श्रीकृष्ण जन्मस्थान और 2.5 एकड़ जमीन शाही ईदगाह मस्जिद के पास है। 1968 के समझौते के आधार पर यह बंटवारा हुआ, जो विवादों में है।

शाही ईदगाह मस्जिद
  • हिंदुओं का दावा है कि ईदगाह मस्जिद की जमीन पर पहले मंदिर था, जिसे औरंगजेब ने तुड़वाकर मस्जिद बनवाई थी।
  • ईदगाह मस्जिद उसी स्थान पर है, जहां कंस के कारागार में देवकी ने श्रीकृष्ण को जन्म दिया था।
  • हिंदू पक्ष पूरी 13.37 एकड़ जमीन पर मालिकाना हक चाहता है। 25 सितंबर 2020 को मथुरा कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।
  • मथुरा कोर्ट ने Places of Worship Act 1991 के आधार पर याचिका खारिज कर दी थी।
  • 12 अक्टूबर 2020 को पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शाही ईदगाह मस्जिद के सर्वे का आदेश दिया।
  • मुस्लिम पक्ष यह नहीं मानता कि मस्जिद श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर बनी है।

विवाद का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद के बीच का विवाद ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्यों पर आधारित है। 162 वर्ष पहले Archaeological Survey of India (ASI) की सर्वेक्षण रिपोर्ट इस विवाद को समझने में महत्वपूर्ण है।

ASI सर्वेक्षण
  • 160 वर्ष पहले ASI ने पुष्टि की थी कि शाही ईदगाह मस्जिद प्राचीन मंदिर के अवशेषों पर बनी है।
  • 1832 से 1935 तक मथुरा जिला अदालत और इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूरी जमीन का मालिकाना हक हिंदुओं को माना था।
  • मथुरा के राजस्व रिकॉर्ड में मस्जिद की जमीन श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट के नाम दर्ज है।

पांच प्रमुख सबूत

श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े निम्नलिखित दस्तावेज इसके ऐतिहासिक महत्व को प्रमाणित करते हैं:

औरंगजेब का फरमान (27 जनवरी 1670)

औरंगजेब का फरमान (27 जनवरी 1670)

इस फरमान में लिखा है कि रमजान के महीने में मथुरा के केशव देव मंदिर को तोड़ने का आदेश दिया गया। मूर्तियों को आगरा की बेगम साहिब मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे दफनाया गया।

ASI की 160 वर्ष पुरानी रिपोर्ट

ASI की 160 वर्ष पुरानी रिपोर्ट

ASI की रिपोर्ट में शाही ईदगाह मस्जिद के प्राचीन मंदिर के अवशेषों पर बने होने की पुष्टि की गई थी।

1968 का समझौता

1968 का समझौता

श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और शाही ईदगाह इंतजामिया कमेटी के बीच 1968 में हुए समझौते की मूल प्रति।

1935 का इलाहाबाद हाईकोर्ट फैसला

1935 का इलाहाबाद हाईकोर्ट फैसला

इस फैसले में हिंदुओं के पक्ष में निर्णय सुनाया गया था।

राजस्व रिकॉर्ड

उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग में शाही ईदगाह मस्जिद की जमीन श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के नाम दर्ज है।

ऐतिहासिक साक्ष्य

इतिहासकारों के अनुसार, 1670 में मंदिर के विध्वंस के बाद शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण हुआ, जिसमें मंदिर के अवशेषों का उपयोग किया गया।

मंदिर अवशेष

डॉ. फ्रांस्वा बेर्नियर ने अपनी पुस्तक Travels in the Mogul Empire 1656-1666 में मथुरा के केशव राय मंदिर की सुंदरता का वर्णन किया है।

गैलरी

निष्कर्ष

उपरोक्त साक्ष्य स्पष्ट करते हैं कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। सनातन न्यास फाउंडेशन इन साक्ष्यों के आधार पर इस पवित्र स्थल के संरक्षण और पुनर्स्थापना के लिए प्रयासरत है।